मनमानी ढंग से चल रहे हैं शिक्षा के केंद्र।

मनमानी ढंग से चल रहे हैं बेसिक विद्यालय कब आए कब गए कुछ खबर नहीं ना ही कोई निगरानी अगर किसी ने पूछ दिया कि ऐसा क्यों है तो आपको क्या अधिकार है यह पूछने का यह जवाब मिलता है अगर आप पत्रकार हैं तो मेरे घर भी पत्रकार हैं क्या आप इनको जानते हैं उनको जानते हैं ऐसे जवाब मिलते हैं तो क्या इन्हें मनमानी ढंग से विद्यालय  चलाने का अधिकार आला अधिकारियों ने दे रखा है क्या यह समय से विद्यालय नहीं आएंगे बच्चों को समय से नहीं पढ़ाएंगे बच्चों के अंदर विकास की धारा नहीं बहेगी क के ग लिखना नहीं जानते या आगे के विद्यालयों में जाकर ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा है बेसिक विद्यालय का कोई भी बच्चा अगर माध्यमिक में जाता है तो उसे उस स्तर की चीजें नहीं आती माध्यमिक स्तर का बच्चा कोई इंटर कॉलेज में जा रहा है तो उसे माध्यमिक स्तर की चीजें नहीं आती तो वह कैसे आगे अपने आप को ले जा सकेगा यह जिम्मेदारी बेसिक से शुरू होकर अंत में उसके मानसिक विकास तक जाता है लेकिन इस विषय में कोई जरा भी नहीं सोच रहा है और मनमानी ढंग से एक बार अध्यापक बन जाने के बाद जान रहा है कि मैं सरकारी नौकरी में हूं क्या कोई भी बिगड़ेगा मैं ऐसे ही देश के भविष्य को तैयार करता रहूंगा और लोग मजबूर होकर चाहे जितना भी पैसा लग जाए अपने बच्चे को प्राइवेट में पढ़ाना चाहते हैं अपना घर बेचकर अपनी जमीन बेच करके उसका भविष्य तैयार करना चाहते हैं क्या हमारा समाज बेसिक विद्यालयों का सरकारी विद्यालयों का निर्माण इसीलिए कराता है कि लोगों के धन जो उसके भविष्य के और भी विकास कार्य में लगने चाहिए उसके घर बनने चाहिए शौचालय बनने चाहिए उसके रास्ते अच्छे होने चाहिए इसमें ना खर्च करके मजबूरी में शिक्षा माफियाओं के हाथ में जाकर अपनी पूंजी गवा देते हैं और उन्हें शिक्षा तो मिल जाती है लेकिन एक सीख मिलती है कि बिना पैसों के अगर हम शिक्षा लेकर देश की सेवा करेंगे तो शायद हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे लेकिन सरकारी सेवाएं देने वाले लोग यह क्यों नहीं समझते कि सरकारी सेवाएं एक ऐसी विधि है जिससे समाज में आपके पास कम पूजी होने के बावजूद आपको एक ऐसा जगह देता है जिसे आप कम पूंजी में अपना बेहतर विकास करने में सक्षम हो सकें और एक दूसरे की सहायता से आगे बढ़ने का काम करते हैं यह सोचने का विषय है और गंभीर सोचने का विषय है कृपया इसमें सोच विचार कर उन अधिकारियों से अनुमोदन है कि अपनी पद के अनुसार हर कार्य को सृजित करा कर के एक बेहतर समाज में विकल्प कायम रखें। हिन्दुस्तान न्यूज