कितने प्रतिशत14 साल से कम उम्र के बच्चे अभी भी बेसिक शिक्षा से दूर 

.सरकार द्वारा बहुत सारे विभाग बच्चों के विकास के लिए बनाए जा रहे हैं इसमें चाइल्ड वेलफेयर सुसाइड क्यों की भरमार है और प्रोबेशन विभाग भी इन बच्चों के जो 14 साल से कम उम्र के हो उनके लिए बहुत सारे प्रयास करने में जुटे हुए हैं श्रम विभाग से भी कार्यवाही जारी रहती है लेकिन अभी भी बहुत सारे बच्चे जो गरीबी रेखा में अथवा गरीबी रेखा से नीचे परिवारों में हैं वह अपने दिनचर्या में काम करने को मजबूर हैं अथवा गार्जियन के लापरवाही की वजह से व उन कार्यों में लिप्त हैं सरकार द्वारा बनाई गई संस्था वृहद स्तर पर कार्य नहीं कर पा रही है लेकिन किस कारण से गिनती में अथवा प्रतिशत में काफी बच्चे अभी भी बेसिक शिक्षा से दूर हैं और अपने जीवन को सुधारने हेतु कोई भी ऐसा सिस्टम मे नहीं जा पा रहे हैं जहां उन्हें सुरक्षित भोजन कपड़ा व शिक्षा देकर उन्हें समाज में एक सभ्य और विकसित बनाकर समाज में बेहतर ढंग से काम करने वह सुरक्षित समाज के व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत हो सके यह कहा जा सकता है कि समाज में बहुत सारे दोषअभी भी व्याप्त हैं। जहां सरकार ने सरकारी स्कूलों में भोजन प्रबंधन के साथ शिक्षा को मुफ्त किया है। वहीं कुछ लापरवाह शिक्षक सरकार की मंशा अनुसार कार्य न करके केवल वेतन उठाकर और आडंबर दिखाकर यह दावा कर रहे हैं कि वह शिक्षा के स्तर को बढ़ाते हैं लेकिन उनकी जिम्मेदारी यहीं तक खत्म अगर हो जाती हो तो उनके लिए ठीक था उनका कहना है कि वह पकड़ कर बच्चों को नहीं पढ़ा सकते बच्चे भाग जाते हैं अथवा गार्जियन लापरवाह हैं तो क्या शिक्षक का कर्तव्य नहीं है कि वह उन्हें प्रेरणा की तरह लें और उचित मार्गदर्शन और अपने प्रयासों से गरीब बच्चों वह लापरवाह बच्चों को बच्चों को शिक्षा की ओर मोड़कर उनके जीवन में प्रकाश फैलाएं शिक्षक एक ऐसा व्यक्तित्व होता है जो राह चलते शिक्षा का ऐसा प्रकाश फैलाता है जिससे अंधकार में जी रहे व्यक्तित्व भी प्रकाश में आकर अपने जीवन को सुधार कर समाज को प्रकाशित करने का कार्य करते हैं ऐसा बहुत सारा उदाहरण प्रस्तुत समाज में मिलेगा लेकिन आज के शिक्षक केवल समय से पहुंच जाएं और अपनी कक्षाओं को सही से संचालित कर लें यही जिम्मेदारी उनकी बहुत बड़ी हो जाती है और पूर्व में जो शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझते थे और उन बस्तियों में जाकर उन बच्चों को जो इस तरह से लापरवाह वह गरीबी हालत के कारण कभी पढ़ाई की ओर अग्रसर नहीं थे उन्हें अग्रेषित करके उन्हें अच्छे अच्छे कार्यों में सहयोग हेतु एक व्यक्तित्व प्रदान कर दिया लेकिन आज के वर्तमान शिक्षक विरले ही उदाहरण मिलेंगे वह ऐसा करें ।लेकिन सरकार द्वारा संस्थाओं की भी कमी हो रही है और हमारी सामाजिक संस्थाएं भी केवल खानापूर्ति करने के लिए तैयार बैठी हैं प्रयासों के दौर में हमारा ऐसा प्रयास होना चाहिए कि एक भी ऐसा बच्चा न छूटे जो शिक्षा से वंचित हो और अपने व्यक्तित्व विकास में कहीं से रूकावट। इसके लिए पूरे समाज को मिलकर ऐसे बच्चों को शिक्षा की तरफ धकेलना चाहिए ताकि वह एक विचार ऐसा प्राप्त कर सके जिससे वह अपने व्यक्तित्व स्वास्थ्य विकास और शिक्षा के विकास को उच्च स्तर पर ले जाकर ऐसा नागरिक बने जिससे वह देश को और विकास की गति देने में सफल हो। इसमें सहयोग ही एक ऐसा सूत्र है जो हर समस्याओं का समाधान रखता है इसलिए हमें सहयोग जैसे सामाजिक सूत्र का प्रयोग कर इन सब सारी समस्याओं का निराकरण करने में समाज का और खुद का दूसरों का ध्यान रखकर सहयोग द्वारा समाधान खोजना चाहिए।