ओवरफ्लो होती समस्याएं समस्या का निदान कैसे कराए

मानव सभ्यता के विकास में समस्याएं तमाम तरह की होती है और समस्याओं के लिए एक सिस्टम बनाया जाता है कि इस समस्या को उसके अंतर्गत ही रखना है उससे ऊपर जाएगी तो वह और गहरी समस्या मानी जाएगी और उसे त्वरित निदान की आवश्यकता होगी लेकिन सरकार द्वारा बनाए गए समस्याओं के निदान हेतु सिस्टम को भी ओवरफ्लो कर रही हैं समस्याएं जैसे सरकार ने सफाई के लिए बहुत सारी योजनाओं को तैयार कर लिया है घर से कूड़ा उठाने को लेकर उसे निपटारे तक सरकार ने व्यवस्थाएं कर रखी है लेकिन घर से कूड़ा समय से उठना और सड़क पर रखे कचरे का समय से उठान होना ओवरफ्लो होती दिखती है समस्याओं का सही ट्रैक पर ना चलना और अधिक गंभीर दिखना समय से हर कार्य ना होना और समस्याओं के ओवरफ्लो की दिशा में कदम होती है और कोई भी सिस्टम ले हर चीज के लिए एक समय सीमा बनाई जाती है लेकिन वह समय सीमा में भी कार्य ना हो तो उस कार्य को लंबित मानी जाएगी और यह उस समस्या के लिए ओवरफ्लो टाइम माना जाएगा जैसे आरटीआई 45 दिन के अंदर देना होता है लेकिन यही दिन जब उसे ऊपर होता है तो एक आरटीआई डालने वाले के लिए बड़ी चुनौती होती है कि वह आरटीआई यह समय को को चैलेंज कर दे लापरवाह अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही कराएं। लेकिन तब तक समस्याएं ओवरफ्लो हो जाती हैं, वाराणसी वरुणा नदी मैं बहने वाले नाले में प्लास्टिक कचरा को निकालने हेतु सिस्टम को तैयार किया गया है लेकिन यह सिस्टम भी फेल नजर आ रहा है वाराणसी के वरुणा नदी के पास में नक्की घाट की तरफ बने सीवर के नालों में प्लास्टिक के संयंत्र लगाए गए हैं जो प्लास्टिक को साफ करने हेतु कार्य करेंगे लेकिन यह पानी इतना ओवरफ्लो हो रहा है कि नालों से बाहर आकर नदी के किनारों में छेद बनाकर अपना रास्ता बनाया है जब कुछ सुखे के समय ऐसा हो रहा है तो बरसात में शहरों की स्थिति क्या होगी वह भी वाराणसी जैसे शहरों में जो सीवर के मामलों में बहुत ही मेहनत कर रहे हैं लेकिन बरसात आने पर समस्याएं जस की तस और नालियां ओवरफ्लो होती है इसीलिए कहा जा रहा है कि जब समस्याएं ओवरफ्लो हो जाए तो सरकार को और आम जनता को उससे निबटने के लिए किन तरह के नीतियों रणनीति को तैयार करना चाहिए ताकि ओवरफ्लो समस्याओं से निजात पाया जा सके और उससे होने वाले गंभीर समस्याओं से बचा जा सके।