लोकतांत्रिक महोत्सव गणतंत्र दिवस के मायने गणतंत्र दिवस लोकतांत्रिक व्यवस्था का द्योतक।

प्रवीन रिवाइवल–
आज पूरे भारत में लोकतांत्रिक महोत्सव 26 जनवरी 2022 गणतंत्र का 73 वां महोत्सव मना रहा है लोकतंत्र में संवैधानिक महत्व को दर्शाने वाला यह पर्व सभी भारतीयों के हृदय में 26 जनवरी के आते ही उमंग के साथ उछाल मारने लगता है बच्चे हो या बूढ़े सभी इस सुबह का इंतजार करते हैं की कहीं पर झंडा फहराएंगे और मिष्ठान पाएंगे और इस लोकतंत्र के महापर्व में अपनी सहभागिता देंगे। आज से 73 साल पहले 26 जनवरी 1950 को हमारे गणतंत्र की स्थापना की गई थी यह निश्चित किया गया था कि हमारा भारत सरकार इस गणतंत्र के अनुसार संवैधानिक तरीके से देश को आगे ले जाएगा और इसको बार-बार हम बनाकर याद करते हैं कि हमारा देश गणतंत्र के मानक पर स्थिर है लेकिन कुछ देश विरोधी हुआ कुछ स्वार्थी व्यक्ति इस लोकतंत्र के मायने को अपने कुछ लाभ के लिए अव्यवस्थित करते नजर आ रहे हैं इस पर्व की खुशी में यह एक कचोट का सोच आज हर भारतीय व्यक्ति के मन में है कि आखिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में चूक कहां हो रही है क्या हम अपना मत अधिकार देने के बाद भी खो देते हैं और उसके बाद जो भी संगठन सरकार बनाता है वह हम पर शासन करने लगता है या एक राजतंत्र की व्यवस्था है लेकिन इतने बड़े लोकतंत्र में संविधान एक हथियार है जो आम आदमी को लोकतंत्र की श्रेणी में लाकर खड़ा करता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को चलाने पर और लोगों को विवश करता है और हर व्यक्ति के अधिकार मूल अधिकार व स्वतंत्रता की रक्षा करता है इसलिए हर बार यह पर्व हमारे जीवन में एक उर्जा और एक आत्मविश्वास लेकर आता है कि हमारे देश में हमारा संविधान ही हमारा भगवान है और इस संविधान पर एक लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम है जिसमें हम अपनी व्यक्तिगत व सार्वजनिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपने देश का संचालन कर करा सकते हैं    जय हिंद जय भारत।