Tuesday, January 25, 2022

प्रजातंत्र का राज और आज की सामाजिक व्यवस्था।

प्रजातंत्र के रूप में आज हमें अपनी आजादी का एक रास्ता जरूर दिख रहा है लेकिन क्या या प्रजातंत्र आज के सत्ता तक लड़ाई में  राजतंत्र का आभास नहीं करा रहा है कौन है वह लोग जो इस प्रजातंत्र में अपना राजतंत्र लागू करना चाहते हैं इस तरह सब पार्टियों का अनुमोदन के बाद उसको अच्छी तरह कैसे चला सकते हैं आज आजादी के बाद से यह बेमानी सी दिख रही है यहां पर किसी महात्मा ने कहा है कि अपना विकास तब समझो जब आम व्यक्ति जो एकदम निचले सरका हो अगर उसके प्रगति में सुधार हो तब तो प्रजातंत्र का कोई अर्थ होता है नहीं तो आज हम जिस प्रजातंत्र को समाज में लागू करना चाहते हैं उसे कुछ लोग अपनी मुख्यधारा से जोड़कर राजतंत्र का शासन लाना चाहते हैं यह नहीं जानते कि यह प्रजातंत्र का राज ही है और पूजा के लिए होता है लेकिन किसी व्यवस्था के कारण प्रजा इस बात का आभास नहीं कर पा रही है कि इस तंत्र में उस का क्या रोल है इस तरह से कुछ बाहुबली और धन बली सत्ता को हत्या करके अपना राज कर रहे हैं ईश्वर हमें आज विचार करना चाहिए और अपने लोगों को इस कदर एकजुट होना चाहिए ताकि इस प्रजातंत्र का कुछ मायने कुछ अर्थ निकलता हो जिसे भी हम चुनें अपने सरकार को चलाने के लिए उस सरकार का काम होना चाहिए कि हमारा व कार्य सुनिश्चित ढंग से सुव्यवस्थित ढंग से करें और 24 * 7 के दिन में कार्यवाही को पूरा करें अगर ऐसा नहीं होता है तो सत्ता में ऐसे बाहुबली ऐसे धन बली लोगों का राजतंत्र जाना उचित है अगर जनता इस बात को ना समझे जनता को समझना चाहिए कि वह प्रजातंत्र का राजतंत्र का निर्माण करें ताकि उसके लिए कोई व्यवस्था है सार्वजनिक रूप से उसके समाज में समाहित हो

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